वो इश्क था

चाहत को अपनी फना होकर भी संवारा करते हैं
नहीं करते ख्याल वो कितना ख्याल हमारा करते हैं

वो तारा होता तो उसे तोड़ लाता ,वो चांद था
अस्ल  प्यार का जिसे  बस  निहारा करते हैं

वो दुनिया होता तो नई ढूंढ लेता ,वो ज़िंदगी था
असीर उसके ढूंढते जिसे सभी गुजारा करते हैं

वो सांस होता पल में छोड़ देता वो इश्क था
भूल जानकर भी जिसे सभी गवारा करते हैं

वो दिल होता तो निकाल फेंक देता वो धड़कन था
जिसकी आवाज़ में हम  मोहब्बत पुकारा करते हैं

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… युवराज अमित प्रताप 77
…. मोहब्बत भरी ग़ज़ल

         

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