सलाम बिगड़ा था

सलाम बिगड़ा था जानां पयाम बिगड़ा था
तुम्हारे ख़त में लिखा मेरा नाम बिगड़ा था

फ़लक उदास सितारे थे रूठे रूठे से
मिज़ाज चांद का भी शब तमाम बिगड़ा था

मिटी मिटी सी थी तहरीर आपके ख़त की
बताना उनसे ये क़ासिद सलाम बिगड़ा था

फ़क़त हमारे ना रहने से देख लो तुम भी
तुम्हारी बज़्म का सारा निज़ाम बिगड़ा था

सुना दो फिर से मुझे तुम कलाम अपना अब
दिया था तुमने मुझे जो कलाम बिगड़ा था

फ़क़त था जिस्म ही बिस्तर पे साद मेरा यह
दिलो दिमाग़ ओ कहीं थे क़याम बिगड़ा था

अरशद साद रूदौलवी

         

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