यूँ मिलन हमारा , सनम कोई हादसा नहीं है .

++ग़ज़ल ++(12122 12122 12122 12122 )
हयात में यूँ मिलन हमारा , सनम कोई हादसा नहीं है .
रज़ा ख़ुदा की तभी तो अब तक , मेरा कोई हमनवा नहीं है .
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हसीन होगी ये ज़िंदगी भी ,अगर निभा दो हयात में संग ,
यकीन करना मेरी वफ़ा पर ,ग़लत कोई फैसला नहीं है .
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क़ुबूल उल्फ़त नहीं करो तो , ज़रा रखो हाथ दिल से पूछो
तुम्हारे दिल की भी आरज़ू ये, फ़क़त मेरी इल्तजा नहीं है .
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दिखा रही है हया की सुर्खी , हर एक हरक़त है तन बदन की
नज़र कहे हाँ है दिल में भी हाँ , लबों को बस हौसला नहीं है .
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करो नहीं अब यूँ वक़्त जाया , न बीत जाएँ हसीन लम्हे
मुझे पता है तेरा भी मक़सद, ज़रा सा भी अलहदा नहीं है .
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न जात की है न पाँत की है . नहीं है मजहब की कोई अड़चन
करो अगर अब जो देर ऐसा , लगा मुझे मसअला नहीं है .
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क़सम से बोलो कि प्यार मुझसे ,नहीं हुआ है ए जान-ए-जानां
अगर ये सच है तो इस से बढ़कर, मुझे कोई भी सज़ा नहीं है .
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हज़ार मुझको कहे ज़माना, तुम्हारा रुख अब बदल गया पर
यकीन मुझको कभी न होगा , मेरी सलामत वफ़ा नहीं है .
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तेरा तसव्वुर ख़याल तेरे ,है ख़ाब में आमदें जो तेरी
यही सबब है सनम अभी तक ‘तुरंत’ भी ग़मज़दा नहीं है .
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी .

         

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