अगर ज़िंदा हो तो….

अगर  जिंदा  है  तो  जिंदा  नजर आने  की  कोशिश कर
फ़लक तक अपनी मेयारी को  ले जाने की  कोशिश कर

मिसाल -ए- इत्तिहाद -ए- अब्र  पे  छाने की कोशिश कर
किसी मज़लूम को हक़ उसका दिलवाने की कोशिश कर

न   केवल   देख   उसकी   ख़ूबियाँ   जो    है   बुलंदी   पर
मगर  ऐ  दोस्त  उस  ख़ूबी  को  अपनाने की कोशिश कर

इबादत   का   सलीक़ा   ये    भी   है   गर    सीखना   चाहे
किसी   रोते   हुए   बच्चे   को   बहलाने  की  कोशिश कर

वो  हर   ज़र्रे   में   है   हर   शै   है   उसके   नूर   से   रौशन
मिलेगा   वो   यक़ीनन   ‘दीप’  तू   पाने की   कोशिश कर

भरत दीप                                                                ©


मेयारी= अच्छाई, qualities
मिसाल -ए- इत्तिहाद -ए- अब्र= अनुकरणीय मित्रता तथा दया भाव का चरमोत्कर्ष

         

Share: