“अच्छा बीज बोना होगा”…

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ज़िद कर लो अगर तो यहाँ वक़्त को भी अपना होना होगा ।
हर पल में मजा ले लो तो अकेले में नहीं रोना होगा ।
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सुना है सबने ग़म बाँटने से कुछ दर्द कम हो जाता है ,
सो साझा करके ही सारा ग़म , दिल के आहों को धोना होगा ।
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आस ख़तम तो समझ लो , एक झटके में फिर ये साँस भी ख़तम ,
अच्छे दिन ज़रूर आयेंगे , ख़्वाब पलकों पे पिरोना होगा ।
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चुन-चुनकर ख़ूबसूरत लम्हा , यादों में समेटना सीख लो ,
काँटों के संग फूल यानी दुख औ सुख का बिछोना होगा ।
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हाथ उठ जाए अगर किसी ज़रूरतमंद के मदद के लिए ,
तो फिर क्या कहना , ये ज़ज़्बा बहुत ही सुंदर-सलोना होगा ।
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कमी नहीं है खरपतवार की , दिमाग़ में झट से उग जाते ,
अच्छी फसल चाहो अगर , ज़ेहन में अच्छा बीज बोना होगा ।
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आज अगर है ज़िंदगी से कोई भी ग़िला-शिक़वा तो सुन लो ,
दोस्त बना लो रब को , मज़ा जीवन में कोना-कोना होगा ।
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लहरों से डरकर अगर किनारे-किनारे ही अब खड़े रहे ,
क्या अर्थ फिर ज़िंदगी का , जीवन-नाव यूँ ही डुबोना होगा ।
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किस्मत जो भी रंग दिखाए , डटे रहो “कृष्णा” जैसे ,
आखिर में तो सबका नसीब , मिट्टी में जाकर सोना होगा ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 08/02/2019 )

         

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