असर जिनकी दुआओं में

असर जिनकी दुआओं में सभी तक़लीफ़ जो हरती।
ज़मी पर जन्म लेने से वही अब बेटियाँ डरती।।

नहीं हैवानियत कोई न इल्मो – जुर्म से वाक़िफ़।
वही रोती सिसकती हैं वही फिर खुदकुशी करती।

दरिंदों की नहीं होती कभी अपनी बहन शायद,
अगर होती कहीं तो यूँ नहीं इंसानियत मरती।।

यही मस्ज़िद में आयत सी यही मंदिर की देवी हैं।
इन्हीं की कोख से जीवन ज़हाँ में ये खुशी भरती।।

कहाँ मज़हब कोई कहता किसी को तुम मिटा दो यूँ।
नज़र की तीरगी ही तो ‘अधर’ बे-आबरू करती।।

शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

         

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