आज हर इन्सान ग़म से चूर है

आज हर इन्सान ग़म से चूर है।
देखिये जिस को वही मजबूर है।।
धन पराया हो गई हैं बेटियाँ।
क्या ज़माने का यही दस्तूर है।।
हक़ गरीबों को यहाँ मिलता नही।
देश का नेता यहाँ नासूर है ।।
दाल रोटी मिलना मुश्किल है यहाँ।
लग रहा दिल्ली अभी भी दूर है ।।
पैसा पैसा कर रहा है आदमी।
पा लिया पैसा मगर रंजूर है।।
प्यार “अंशु” ने सिखाया था जिसे।
इस ज़माने मे वही मशहूर है।।
     ©अंशु कुमारी

         

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