“आदत कुछ ठीक नहीं”…

°°°
बेवज़ह निर्माण करो कोई ज़रूरत कुछ ठीक नहीं ।
बुरी लत जो बन जाये कोई आदत कुछ ठीक नहीं ।
••
यूँ तो अहसान जताना अब हर किसी को आता है ,
मगर बात-बात में हो रही शिक़ायत कुछ ठीक नहीं ।
••
भावनाएँ बहुत उछाल मारती , मगर हद में रहो ,
जाँ पे बन आये कोई जो शरारत कुछ ठीक नहीं ।
••
ज़िंदगी की हरकत से बच्चों को दो-चार होने दो ,
बात-बात में मिले जो हर सहूलियत कुछ ठीक नहीं ।
••
आस-पास की चुगली करना ग़ैरकानूनी समझो ,
इस तरह की फ़िज़ूल दिन भर की फ़ुर्सत कुछ ठीक नहीं ।
••
इंसान हो तो पहली ज़रूरत है रहम-दिल होना ,
घमंड साथ है तो वो हसीन सूरत कुछ ठीक नहीं ।
••
पीने वालों को पीने के लिये बहाना चाहिए ,
कुछ न सूझा तो पी लेते कह , तबियत कुछ ठीक नहीं ।
••
दिल चुरा मासूमियत से पूछते हैं लोग यहाँ पर ,
क्यों , क्या हुआ ? अरे ऐसी भी शराफ़त कुछ ठीक नहीं ।
••
प्यार करते हो तो ताउम्र साथ निभाना “कृष्णा” का ,
बीच राह में बदल जाये जो नीयत कुछ ठीक नहीं ।
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 14/05/2018 )

         

Share: