“क़दर करते जाना”…

°°°
काम कुछ ऐसा हो कि गहरा असर करते जाना ।
वज़ूद है कुछ अलग , सभी को ख़बर करते जाना ।
••
ग़म और खुशी एक ही सिक्के के हैं दो पहलू ,
आशा की किरण के साथ बस सफ़र करते जाना ।
••
अपनी ख़्वाहिश के चक्कर में ज्यादा उलझना मत ,
अपने आसपास इधर एक नज़र करते जाना ।
••
ज़रा सोचो कहीं अज़नबी तो नहीं बन रहें हम ?
समय रहते सभी रिश्तों की क़दर करते जाना ।
••
फ़िज़ा में नफ़रतों की मिलावट रोकना ज़रूरी ,
हर दिन चैन की बस नसीमे-सहर * करते जाना ।
••
हड़बड़ी में कोई भी काम करना वाज़िब नहीं ,
सफलता पाने हेतु हरदम सबर करते जाना ।
••
मुहब्बत से बढ़कर कोई दवा है ही कहाँ अब ?
प्यार जो करे “कृष्णा” उसकी मफ़र * करते जाना ।
°°°
* नसीमे-सहर = सुबह की हवा
* मफ़र = बचाव
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 25/10/2018 )

         

Share: