किस्मत रगों में बहती लहू में लिखा चाहिए

बने-बनाए मकाँ के सब के सब हक़दार हैं
पर घर बनाने के लिए तौर-तरीका चाहिए

जो भी मिला, हिन्दू या मुसलमान ही मिला
इंसान बनने के लिए बतौर सलीका चाहिए

माखौल ही बना देगी ज़माने की ये ज़ुल्मत
जीने के लिए पढ़ा-लिखा व सीखा चाहिए

ये तूफ़ान यूँ ही किसी को रास्ता नहीं देता
मंज़िल के पाने को साथ सभी का चाहिए

गर हाथ की लकीरों में नहीं , तो ना सही
किस्मत रगों में बहती लहू में लिखा चाहिए

सलिल सरोज

         

Share: