क्या देगा तुझे

जब अंधेरे में घिरेगा वो जला देगा तुझे
ऐ दिये वो रोशनी लेकर बुझा देगा तुझे।

रोशनी का जश्न ये शब भर का है,इतरा न तू,
सुब्ह होने तक जुनूँ तेरा मिटा देगा तुझे।

दर्द आँसू टीस फ़ुरक़त ज़ख्म रुसवाई मलाल,
वो भला इसके अलावा और क्या देगा तुझे।

पूस की ठिठुरन भरी रातों से गर तू बच गया,
जेठ की तपती दुपहरी में जला देगा तुझे।

बारिशें काली घटाएं हैं तो अच्छी चार दिन,
देर तक बरसा तो सावन भी बहा देगा तुझे।

शोहरतों की ख़्वाहिशें मत पाल बस ईमान रख,
रब की मर्ज़ी है वो जब चाहे उठा देगा तुझे।

पाप की लंका जली तो ख़ाक हो जाएगा सब,
और फिर दोज़ख़ का मंज़र भी दिखा देगा तुझे।
©️®️Manjull Manzar Lucknowi

         

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