खतरे जगह जगह

यूँ ही न लग रहे हैं ये पहरे जगह जगह|
खतरों का शहर है ये तो खतरे जगह जगह|
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पीकर शराब खून की कीमत यूँ गिर गयी,
बिखरे हैं जो सड़क पे ये कतरे जगह जगह|
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जुल्मी हुए हैं शेर न मिलती उन्हें सजा,
चढ़ते हैं बलि यहाँ पे तो बकरे जगह जगह|
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कारें खरीद लेते बना कर वो रासते,
गड्ढे तभी तो राह में गहरे जगह जगह|
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फरियाद मुफलिसों की न सुनते हैं वो मनुज,
बैठे हैं दफ्तरों में तो बहरे जगह जगह|

         

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