मुहब्बत की इनायत तक

मुहब्बत से मुहब्बत तक
मुहब्बत की इनायत तक

तुम्हारी राह देखेंगे
चले आना कयामत तक

नसीहत रह गई है अब
फकत यारो नसीहत तक

निभाती साथ है दुनिया
फकत अपनी जरूरत तक

है कैसा खौफ बच्चों पर
नहीं करते शरारत तक

जो मुजरिम छूट आया है
बिकी होगी अदालत तक

कुछ ऐसे भी मुसलमाँ है
नहीं आती इबादत तक

अरशद साद रूदौलवी

         

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