चेहरे पर चेहरा लगा लीजिए

चेहरे पर चेहरा इक लगा लीजिए
झूठ सारे यूँ अपने .छुपा लीजिए

दाद गर न मिले महफ़िल में.ं तो
तालियां ख़ुद ही बजा लीजिए

बेहुनर जमानी हो महफ़िल अगर
किसी की ग़ज़ल को चुरा लीजिए

घास. उसने न डाली क्या हो गया
झूठे क़िस्से सभी को सुना लीजिए

रूठी जनता है तो न परेशान हों
झुनझुने दीजिए और. मना लीजिए

ख़ामोश ही लोग रह जायें अगर
अच्छे दिन का बाजा. बजा लीजिए

         

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