“ज़रूरी है”…

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हमेशा रोना नहीं , ज़िंदगी में मुस्कुराना भी ज़रूरी है ।
मुस्कुराने के साथ-साथ ज़रा खिलखिलाना भी ज़रूरी है ।
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खिलखिला जो पायेंगे तो सुख भी आएगा बेहद नज़दीक ,
पर उससे पहले दुख के पल को आज़माना भी ज़रूरी है ।
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आज़मा लिया ग़मों को तो तन्हाई भी दूर हो जायेगी ,
ज़ेहन में लगे शिक़न के सभी परत हटाना भी ज़रूरी है ।
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हट जायेंगे आहिस्ता-आहिस्ता अनचाहे ये सारे पल ,
सकूं चाहिए तो नाउम्मीदों को भुलाना भी ज़रूरी है ।
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भूल जाओ ज़िंदगी में बीत चुके , मिले सभी कटु अनुभवों को ,
मधुर-स्मृति हेतु ख़ामोशी से बाहर आना भी ज़रूरी है ।
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आ जाओ अपनों के क़रीब , दूर-दूर रहना कुछ ठीक नहीं ?
अच्छी यादें क़रीब हो तो रिश्ता निभाना भी ज़रूरी है ।
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निभा लो अब इस ज़हां में , हर दिल से दिल का रिश्ता ऐ “कृष्णा”,
आखिर में दुनिया से एक न एक दिन जाना भी ज़रूरी है ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 08/07/2018 )

         

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