जादूगर ओ जादूगर

ग़ज़ल
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मरहबा तेरा हुनर।।
जादूगर ओ जादूगर।।

ज़र्रे ज़र्रे में तूही।
सारी सृष्टि तेरा घर।।

मर्ग-ए-मायूसी बढ़ी।
सो रहे क्या चारागर।।

पत्थरों की कैद में।
काशी काबा गिरजाघर।।

साथ जलता कौन है।
काठ ऐ तेरा शुकर।।

इल्म को आलिम, यहाँ।
खा गई किसकी नज़र।।

दिल में जिसके अल्फ़ हो।
अब्द होता वो बशर।।

पारदारी हो पिता।
इब्न जीते हारकर।।

‘सुर’ तेरी आगोश में।
रहबरा ओ राहबर।।

।। धन्यवाद ‘सुर।।

         

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