“ठीक नहीं”…

°°°
हर दफ़ा गुस्से का दिखता तेवर प्यारे ठीक नहीं ।
धन की लालच में घूमना मारे-मारे ठीक नहीं ।
••
अपनी बात मनवाने के तरीक़ों पर नज़र डालो ,
बात-बात पर आँखों से निकलते धारे ठीक नहीं ।
••
बेवज़ह अख़बार में उलझे रहना‌ भी वाज़िब कहाँ ,
ग़ौर से देखो तो मिलेगा , ख़बर सारे ठीक नहीं ।
••
अच्छे माहौल का असर ख़ूबसूरत-सी ज़िंदगी है ,
चमकने से पहले डूब जाये सितारे ठीक नहीं ।
••
जीने के मायने है मुश्किलों से दो-चार होना ,
लहर के डर से चलना किनारे-किनारे ठीक नहीं ।
••
हर की गई कोशिश में सफलता का अवसर है छुपा ,
बिना कोशिश के बार-बार हारे ठीक नहीं ।
••
ग़ैरत नाम की भी अनमोल चीज़ होती है “कृष्णा”,
बिना ग़ैरत के यहाँ दो पल भी गुज़ारे ठीक नहीं ।
°°°

         

Share: