दलदल से निकाला जाये

इस से पहले कि मिरा नाम उछाला जाये
ख़ुद को बदनामी के दलदल से निकाला जाये

मैं यही रोज़ दुआ करता हूँ अपने रब से
नूर-ए-हक़ का ना मिरे दिल से उजाला जाये

यूं ना गुमराह कभी होगी कोई नसल नई
उस के क़दमों को अगर पहले सँभाला जाये

दोस्त मुख़लिस है तो बस एक ही अच्छा वर्ना
आस्तीं में कोई भी साँप ना पाला जाये

मेरी परवाज़ में कोताही भी आए जिससे
काश मुँह में ना मिरे ऐसा निवाला जाये

बस यही सोच के महफ़िल में, मैं ख़ामोश रहा
इंतिशारी की हर इक बात को टाला जाये

इलम के नूर से कैसे हो मुनव्वर ये जहां
साद बस ज़ोर इसी बात पे डाला जाये

अरशद साद रूदौलवी

         

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