दिल में मजबूत इरादों की चमक रखते हैं

++ग़ज़ल++(2122 1122 1122 22 /112 )
दिल में मजबूत इरादों की चमक रखते हैं
पाँव धरती पे निगाहों में फ़लक* रखते हैं (*आसमान)
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नाम तारीख़ में उनका ही लिखा है देखा
जो नया ज़ीस्त में करने की सनक रखते हैं
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ज़िंदगी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है उनकी यारों
जो ग़रीबों के लिए दिल में कसक रखते हैं
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काम रुकता न कभी उनका जहाँ में अक्सर
सोच में अपनी जो शाखों सी लचक रखते हैं
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क्यों झुकायेंगे नज़र अपनी किसी के आगे
जो भी किरदार में थोड़ा सा नमक रखते हैं
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किसी इंसान से बढ़कर न हसीं कोई शय
दिल से हम दूर सभी हूर-ओ-मलक* रखते हैं (*अप्सराएं और फ़रिश्ते )
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उसकी नाज़ुक सी कलाई में बजा करते जो
याद में आज भी कंगन की खनक रखते हैं
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नीम-जां उम्र हुई और ख़िजाँ काकुल में
दिल में पर आज भी सपनों के धनक* रखते हैं (*इन्द्रधनुष)
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हार जाती हैं ‘तुरंत’ आफ़तें उनके आगे
पैकरों* में जो पसीने की महक रखते हैं (*बदन )
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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