“दुआ के बग़ैर”…

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दुआ के बिना पलों का रंग कमाल नहीं ।
माँग ले कोई ग़म , एक भी मिसाल नहीं ।
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ज्ञान का भंडार भले इकट्ठा है मगर ,
गलती में झुकना होता बहरहाल नहीं ।
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झूठ की गली के सब कैदी, समझ जाओ ,
सच के दामन तले है कभी बवाल नहीं ।
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शक्ल के अंदर दूजा शक्ल छलावा है ,
सही रिश्ता चलता कोई भी चाल नहीं ।
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फ़क़त यक़ीं पे चलता है ज़िंदगी का सफ़र ,
वरना कौन है जो ढो रहा सवाल नहीं ?
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संघर्ष के बग़ैर जीने का भी मज़ा क्या ?
कठिनाई सहे बिना सुधरता हाल नहीं ।
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इस जादुई दुनिया में मुड़कर मत देखो ,
बढ़ चलो “कृष्णा” फिर कोई जंजाल नहीं ।
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