“दूसरा भी चेहरा होगा”…

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शोर जितना बढ़ता जाये , सन्नाटा भी बड़ा गहरा होगा ।
दो पल में जान ले लेगा जो ज़हर , जीवन फिर बिखरा होगा ।
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वसूल हो नहीं पायेगा पैसा गर बाँट दिया जो उधारी ,
आखिर में चुप हो जाऊँगा मैं , तू भी गूंगा-बहरा होगा ।
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हाथ में त्रिशूल , भगवा कपड़ा और गले में माला रूद्र की ,
पर गौर करना , इक चेहरे में दूसरा भी चेहरा होगा ।
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जीने की वाज़िब वज़ह मिलेगी , जान लो जो मूल बात ,
धीरज जो रख लो तो ज़िंदगी में , हर पल बेहद सुधरा होगा ।
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बड़ी आसानी से अहसास लूट जाते रिश्तों के लुटेरे ,
और मानते नहीं अपनी भूल , अब क्या दर-दर पहरा होगा ?
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रहो मत अब अज़नबी औ कबूल कर लो हाथ मिलाकर दोस्ती ,
मदद की ज़रूरत पड़ेगी , दूर तक रास्ता काँटों भरा होगा ।
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यादों के घनेरे जंगल में “कृष्णा” , इस रात आग लगी है ,
पर कोई ग़म नहीं , मालूम है धीरे से ही सहरा होगा ।
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