“नहीं आता”…

°°°
मुझे किसी के दिल पे उतरकर वापस आना नहीं आता ।
मुहब्बत पे यक़ीं है , मुझे किसी को सताना नहीं आता ।
••
किसी की तक़लीफ़ देखकर बस बरबस आँख भर जाती है ,
मेरे सजल-नयन को ज़रा भी अश्क़ छुपाना नहीं आता ।
••
दूसरों का भी नाज़ुक दिल होता , ये बात मुझे पता है ,
तभी दिल दुखाकर मुझे खरी-खोटी सुनाना नहीं आता ।
••
कोई कर रहा है तरक्की तो ये बहुत ही अच्छी बात है ,
दूजों के जैसे मुझे बेवज़ह जी जलाना नहीं आता ।
••
पता नहीं ज़हां में लोग क्या सोचकर ज़ुर्म कर जाते हैं ?
कुछ गलत करके यहाँ मुझे कहीं भाग जाना नहीं आता ।
••
काम कोई भी हो , इस ज़माने में बिल्कुल तुच्छ नहीं है ,
मेहनत का पुजारी हूँ मैं , मुझे शरमाना नहीं आता ।
••
अगर ख़राब वक़्त आया है तो निकल जायेगा भी जल्दी ,
यूँ कहे तो हताशा का साथ मुझे निभाना नहीं आता ।
••
ऊपर जाकर आखिर ख़ुदा को मुँह दिखाना है , याद मुझे ,
सो अपने क़रीबी को कुछ भी गलत सिखाना नहीं आता ।
••
बड़ी मुश्किल से तो ये ज़िंदगी हासिल हुई है “कृष्णा” को ,
बिना कुछ अलग किये मुझे ज़िंदगी मिटाना नहीं आता ।
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 13/02/2019 )

         

Share: