परिंदा

घर बनाने को देखो इतना समान ले आये
कहाँ से पंछी पंख में इतनी जान ले आये।

करते हैं इतना जतन घर बनाने के लिए
चुन के तिनका चोंच से बागान ले आये।

छोड़ते नही हैं ये साथ कभी अपने साथी का
जोड़ कर दिल संग अपने अरमान ले आये।

टूट जाते है मगर ये तोड़ते नहीं हैं घर
घर बनाने जमी आसमान ले आये।

कर रहे हैं मेहनत थकते नहीं हैं ये कभी
वश में नहीं इनके ये सारा जहां ले आये।
माधुरी मिश्रा, वाराणसी ।।

         

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