पैग़ाम

दिल से अपने नफरतों को, मिटा कर तो देखिए।
बंदिशें ये ज़माने की , फिर हटा कर तो देखिए।

अपने सभी लगेंगे, चाहे राम हों या रहीम।
एक बार इनको प्यार से, गले लगा कर तो देखिए।।

मिलता है बहुत सुकून, ज़माने में इस तरह।
मलहम किसी के जख्मों पर, लगा कर तो देखिए।।

मैं तुझको गले लगा लूँ, तूँ मुझको लगा गले।
ये जज़्बा दिलों में अपने, जगा कर तो देखिए।।

गिरते को जो उठाओगे, तो होगा मर्तबा बुलंद।
ये तरकीब मेरी आप भी, आजमा कर तो देखिए।।

मिट जाएंगी सब नफ़रतें, न होगा कोई गैर।
रिश्ते मोहब्बतों के अब, निभा कर तो देखिए।।

मिलता बहुत सुकून है, मिटते हैं सारे गम।
रोते को ज़रा एक बार, हँसा कर तो देखिए।।

बिन मांगे ही मिल जाती है, इज़्ज़त बहुत अमन।
अपनी अना को अपनो पर, झुका कर तो देखिए।।

         

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