फिर दीवानगी किस बात की

ज़िया ही कहे जब हालात की
कहें क्या चाँदनी के जज़्बात की

चाँद ही ना जो आया नज़र
करते हो बात किस रात की

साबित हो गया जब इश्क़ था
कहाँ रह जाती चर्चा जात की

समझ ही जो आ जाये अगर
फिर दीवानगी किस बात की

कब माँगी ली जन्नत तुमसे
जो दी सजा उसे वफ़ात की

गया मारा वो जो मोहब्बत में
बात किसी मूँछ,थी औकात की

मचेगा शोर हर ओर मातमी यहाँ
अखबार बिकेंगे लिख ख्यालात की

ज़िया – चमक , स्प्लेंडर
वफ़ात – मौत , मत्यु

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Yuvraj Amit Pratap 77
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