“फुरसत में”…

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क्या मकसद है ज़िंदगी का , मंथन कर जायें फुरसत में ।
सुंदर सोच को इकट्ठा करके मुस्कुरायें फुरसत में ।
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बड़ी-बड़ी दुनियादारी की बातों से कभी दूर हों ,
सक़ून मिलेगा , ख़ुद को कभी बच्चा बनायें फुरसत में ।
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कमाने के फेर में यूँ उलझे रहना भी ठीक नहीं ,
अपने अंदर छुपा शौक का साथ निभायें फुरसत में ।
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अपनी सेहत का भी ध्यान रखना है बेहद ज़रूरी ,
स्वस्थ हमेशा रहेंगे , हाथ-पैर हिलायें फुरसत में ।
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दिमाग के पोषण के लिए अच्छी आहार होती हैं पुस्तकें ,
रोज दस-बारह पन्ने दिमाग को खिलायें फुरसत में ।
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सिर्फ़ अपने लिए ही जीना तो सचमुच ख़ुदगर्ज़ी है ,
बेहतर है , किसी रोते हुए को हँसायें फुरसत में ।
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ग़म का क्या है , वो तो आता-जाता रहेगा “कृष्णा”,
ज़िंदगी का मजा लेना है तो खिलखिलायें फुरसत में ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 06/01/2019 )

         

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