“बाकी है”…

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1222 1222 1222 1222

अभी तो इन नज़ारों में खुशी की किरण बाकी है ।
सुनो तो यार , मौज़ों की कहानी , अमन बाकी है ।
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न हो ख़ामोश कुछ बीते हुए गुमसुम पलों से तुम ,
ज़रा रूको इधर , सच में सुखों का मिलन बाकी है ।
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ग़मों का दौर ठहरेगा नहीं , ये भी समझ जाओ ,
सफ़र अपना कभी रूके नहीं , कुछ लगन बाकी है ।
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न सोचो अधिक क्या बोलें यहाँ संसार में हम-तुम ,
भरोसा है अभी दमदार वाज़िब चयन बाकी है ।
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यहाँ पर सोचना मत , लोग क्या-क्या बोलेंगे ?
सुनेंगे कान मन की बात , मीठे वचन बाकी है ।
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ज़माने से मिली ठोकर भरोसा तो बढ़ाएगा ,
कदम आगे बढ़ाना , सफलता का वजन बाकी है ।
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किसी के प्यार को “कृष्णा” कभी तुम न ठुकराना ,
अभी भी इस ज़हां में प्रीत में सपर्पण बाकी है ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 17/07/2018 )

         

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