साहिब कभी झगड़ा नहीं होता

बिना कुछ बात के साहिब कभी झगड़ा नहीं होता ।
बजे इक हाथ से ताली कभी ऐसा नहीं होता।।

मुहब्बत तुम अगर करना तो इतना सोच कर करना।
सियासत के ज़माने में कहां धोखा नहीं होता।।

अगर कह दो तुम्हारे प्यार में हम जान दे देंगे।
मगर हम से कभी ईमान का सौदा नहीं होता।।

गवां बैठे हो तुम सुख चैन सब दौलत की चाहत में।
बहुत कुछ है मगर सब कुछ कभी पैसा नहीं होता।।

भरोसा ठीक है लेकिन सभी पर कर नहीं सकते।
सुनो अंशू ज़माने में हर एक सच्चा नहीं होता।।
©अंशु

         

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