बीमार नज़र आता है

सुना इश्क़ में है मुझे पर बीमार नज़र आता है
ग़ुरबत में न मांगी मदद ख़ुद्दार नजर आता है

उसकी क़िस्मत की बेरुख़ी को क्या कहिए अब
ढूंढता है किनारा लेकिन मजधार नज़र आता है

क्ल तलक वो जो हिकारत से थे देखते मुझको
डनकी आंखों में मेरे लिये प्यार नज़र आता है

हर ओर जहां आता था नज़र चमन ही चमन
आज धुआं और ग़र्द का ग़ुबार नज़र आता है

कभी था हुआ करता व्यापार में भी इक रिश्ता
आज तो रिश्तों में भी व्यापार नज़र आता है

पार्लियामेंट जम्हूरियत का मंदिर था कभी पर
आज तो वही मछली बाज़ार नज़र आता है

पीएचडी भी की कर्जे लेकर ग्रैजुएशन के बाद
पकौड़े पकौड़े बेचता  शर्मसार नजर आता है

         

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