“बेक़रारी से बचिए”…

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समय-बेसमय पर लेते उधारी से बचिए ।
सब समझदार हैं बस होशियारी से बचिये ।
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रिश्तों को ग़र बचाना हो तो रहे ध्यान ,
हर किस्म की लुभाती अदाकारी * से बचिए ।
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अपने स्वार्थ में ही पूरा संसार दिखता ,
ग़र ऐसा है तो इस समझदारी से बचिए ।
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कौन क्या कर रहा है , ठीक तरह से जाँच लें ,
बिना समझे किसी की तरफ़दारी से बचिए ।
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झूठों का राज अधिक दिन तक रहता ही नहीं ,
ज़रा झूठ बोलने की बीमारी से बचिए ।
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जान की जोखिम हमेशा ही बनी रहती है ,
दुपहिया वाहन में तीन सवारी से बचिए ।
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हरेक सूरत ख़ूबसूरत लगती है कुछ दिन ,
हुस्न के अदा की शोबदा-कारी * से बचिए ।
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मंज़िल मिलेगी ज़रूर , धीरज रखना होगा ,
शार्ट-कट जाने की बेक़रारी से बचिए ।
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ज़रूरी नहीं है कि हर किसी का भला ही हो ?
“कृष्णा” मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए ।
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* अदाकारी = अभिनय
* शोबदा-कारी = बाजीगरी
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— °•K.S. PATEL•°
( 05/05/2018 )

         

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