“मत मुकर जाना”…

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कोई वादे पे करता है भरोसा , मत मुकर जाना ।
किसी का भरोसा तोड़ने से पहले ज़रा डर जाना ।
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कोई भी सुधार नहीं सकता तुम्हारे व्यक्तित्व को ,
शीशे के सामने ग़ौर से देख ख़ुद ही सुधर जाना ।
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बिना सोचे और समझे कोई भी काम करना नहीं ?
पहले गहराई नापना फिर धीरे से उतर जाना ।
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काम से जी चुराने पर , कोई नहीं निखरा आज तक ?
कड़ी मेहनत करने के बाद , बेहिसाब निखर जाना ।
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कुछ शरीर का परवाह करना भी है बेहद ज़रूरी ,
ज़िंदगी के दौड़ में भाग लेते हुए कुछ ठहर जाना ।
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तुम्हारे लिए अगर कोई दूर रह करता परवाह ,
तो बेझिझक उसके नाम प्यार की वसीयत कर जाना ।
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सोचना क्या दुनिया में अगर , अलग मुकाम बनाना है ,
मनाही है जिस रास्ते “कृष्णा” उधर कभी गुज़र जाना ।
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–°• K.S. PATEL•°
( 28 /05/ 201 )

         

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