“मेरा नाम लेना”…

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ज़माना जब मुँह फेर ले , इक बार मेरा नाम लेना ।
दिल की बात सुनकर दिमाग़ से ज़रा इंतकाम लेना ।
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जल्दबाजी में लिया गया निर्णय गलत होता अक्सर ,
गहराई से सोचना फिर ज़िंदगी में कुछ काम लेना ।
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फूलों का क्या , वो तो दो पल में साथ छोड़ देते हैं ,
साथ छोड़े नहीं तो काँटों का हाथ भी थाम लेना ।
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झूठ बोलने से अगर किसी का भला हो जाता है तो ,
देर न करना , हँसकर अपने सर ज़रा इल्ज़ाम लेना ।
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खुशियाँ पाने के लिये स्वार्थ के तिलस्म से निकल लो ,
दूसरों की भलाई कर फिर दुआओं का खूब ईनाम लेना ।
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मोल अपना कम क्यों लगाते हो कर्म को करते हुए ?
सटीक काम को तलाश लो फिर मनचाहा दाम लेना ।
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जब भी कभी तुम भूलने लगो इस नाचीज़ “कृष्णा” को ,
अकेले बैठ फिर से इम्तिहान ख़ुद का तमाम लेना ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 18/05/2018 )

         

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