मज़दूर का बेटा

दरून ए-चशम जाकर कुछ हसीं मंज़र तलाशेगा
वो अपनी ज़ात का हिस्सा मेरे अंदर तलाशे गा

किसी का थाम ले आँचल अगर मंज़िल की ख़ाहिश है
भटकता ही फिरेगा क्या सदा रहबर तलाशेगा

दुआओं से भरी होगी तुझे ख़ाली नज़र आई
किसी दरवेश की झोली में क्या ख़ंजर तलाशेगा

जो गुल डाली से टूटा, टूट कर जाये कहाँ आख़िर
कभी गुलशन तलाशेगा कभी बंजर तलाशेगा

सफ़र में चलते चलते जब थकन से चूर वो होगा
मुसाफ़िर रास्ते में मील का पत्थर तलाशेगा

नज़रअंदाज कर देगा मेरी सब खूबियां ज़ालिम
वो मुझमें ख़ामियाँ ही ख़ामियाँ अक्सर तलाशेगा

जुदाई तो गवारा कर भी लूं लेकिन कहाँ जाऊं
तुम्हारी याद का फैला हुआ लश्कर तलाशेगा

मेरे हमराह चलता था मेरी तन्हाई का साथी
अँधेरी रात में जुगनू मुझे आकर तलाशेगा

शिकारी से बचाई जां तो अपने होश खो बैठा
मगर जब होश आएगा परिंदा पर तलाशेगा

महक गुल की चुरा लेगा मसल देगा वह भँवरा है
चमन में फिर नया कोई वो लाला ज़र तलाशेगा

मुहब्बत खेल है उसका बदल देगा वो साथी कल
ठिकाना फिर नया कोई नया दिलबर तलाशेगा

थकन से चूर उसका है बदन पत्थर पे सो जाये
किसी मज़दूर का बेटा कहाँ बिस्तर तलाशेगा

अरशद साद रूदौलवी

         

Share: