“ये ज़िंदगी”…

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ये ज़िंदगी , ज़िंदगी है यार मेरे बेहाल मत समझना ।
महसूस करना दोस्त , ख़्वाहिशों का हड़ताल मत समझना ।
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अहसासों का क्या है , आना- जाना तो लगा रहता है ,
सुलझा हुआ है ये हरदम , अनसुलझा जाल मत समझना ।
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परवाह हो जब एक-दूसरे का तो क्या ख़ूब मजा है ,
सब रिश्ते अच्छे हैं , इसे जी का जंजाल मत समझना ।
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कुछ लोग होते हैं इस ज़हां में , बेहद ही साफ दिल के ,
जो झुक जाये कदमों में , उसे कभी हलाल मत समझना ।
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प्यार में हो जाता है इधर , कभी-कभार नोंक-झोंक भी ,
दिल पे मत लेना इसे औ कभी भी बवाल मत समझना ।
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अपने से बड़े जब कुछ पूछे तो सही-सही ज़वाब दो ,
उनकी तसल्ली है ये , इसको महज़ सवाल मत समझना ।
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कोई ज़ेहन में आकर “कृष्णा” अगर ज़िंदगी बन जाए ,
अज़ीज़े-दिल है वो सच में , इसे सिर्फ़ ख़्याल मत समझना ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 03/11/2018 )

         

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