“विश्वास नहीं होता”…

°°°
इस ज़हां में हर कोई हर किसी का ख़ास नहीं होता ।
किसपे कर लें भरोसा , किसी पर विश्वास नहीं होता ।
••
कोई हुनरमंद पढ़ता , कोरे काग़ज़ को आसानी से ,
कोई पूरी किताब पढ़ भी ले , अहसास नहीं होता ।
••
कोई परवाह करता है तो उसका ज़रा क़दर करो ,
अच्छी तरह ख़्याल रखने का मतलब दास नहीं होता ।
••
किसी अपने अज़ीज़ की आँखों में झाँकना मत भूलो ,
तुम ये जानो , तुम्हें देख ही वो उदास नहीं होता ।
••
है यहाँ बहुत से लिबास जिनके अंदर इंसान नहीं ,
और कई इंसानों के बदन पे लिबास नहीं होता ।
••
कोई हालात तो कोई ज़ज़्बात नहीं समझता इधर ,
ग़ौर करना भावुक बंदा कभी बकवास नहीं होता ।
••
ये मोहब्बत का खेल भी “कृष्णा” बड़ा अज़ीब-सा है ,
जो दिल चुरा ले जाता है , अक्सर वही पास नहीं होता ।
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 22/07/2018 )

         

Share: