हसरतों का जनम नहीं होता |

++ग़ज़ल ++(2122 1212 22 /112 )
हसरतों का जनम नहीं होता |
तो जहाँ भर में ग़म नहीं होता |
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वो इयादत* को आ गए मेरी
ये भी अहसान कम नहीं होता |
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लोग बच जाते कत्ल होने से
जुल्फ में गरचे ख़म नहीं होता |
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लोग राहों में खूब मिलते हैं
हर कोई हमकदम नहीं होता |
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काटता रोज आदमी न शज़र
कुदरती फिर सितम नहीं होता |
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सालता होगा दर्द अपनों का
चश्म अक्सर यूँ नम नहीं होता |
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डूबती नाव बीच दरिया में
गर खुदा का करम नहीं होता |
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क्या करेगा हकीम चारागर
कुछ इलाजे वहम नहीं होता |
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मंजिलें तब नहीं नसीब ‘तुरंत’
जब इरादों में दम नहीं होता |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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