हादिसे अच्छे नहीं लगते

नए हर-रोज़ होते हादिसे अच्छे नहीं लगते
बहुत हालात भी सहमे हुए अच्छे नहीं लगते

मुहाफ़िज़ है तिरा दामन बहुत ही ख़ून में आलूद
मगर ये दाग़ दामन पर तिरे अच्छे नहीं लगते

तू नफ़रत बाँटता है और करे अमन-ओ-माँ की बात
तिरे लेकिन ये दुहरे पैंतरे अच्छे नहीं लगते

क़दम पिछ्ला उठाएगा तभी आगे बढ़ेगा तू
शिकस्ता-दिल शिकस्ता हौसले अच्छे नहीं लगते

ज़्यादा जानते हैं जो ज़्यादा चुप ही रहते हैं
अगर हम भी ज़्यादा बोलते अच्छे नहीं लगते

सदा मिलकर रहें जब फूल इक डाली के हैं दोनों
गुलों के दरमियाँ ये फ़ासले अच्छे नहीं लगते

अमीरी और ग़रीबी देखकर ये फ़ैसले करना
अमीर-ए-शहर तेरे फ़ैसले अच्छे नहीं लगते

तुम्हें आवाज़ देता हूँ चले आओ जहां हो तुम
तुम्हारे हिजर में अब रत-जगे अच्छे नहीं लगते

नसीहत और हिकायत है नई नसलों की ही ख़ातिर
अकाबिर के हमें क्यों फ़लसफ़े अच्छे नहीं लगते

कभी बारिश कभी गर्मी कभी सर्दी ज़रूरी है
कभी भी साद मौसम एक से अच्छे नहीं लगते

अरशद साद रूदौलवी

 

         

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