“हुआ कि नहीं…?”

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हसरतों को जो मार दिया , वो क़ातिल हुआ कि नहीं ?
अपने दिल से पूछ लो , क्या कुछ हासिल हुआ कि नहीं ?
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हज़ूमे-शहर परेशान बहुत इस बात को लेकर ,
इस दफ़ा नफ़ा की दौड़ में , वो शामिल हुआ कि नहीं ?
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हमेशा सूरत के पीछे भागना क्या वाज़िब है ?
सीरत कभी देखी नहीं , कहो ग़ाफ़िल * हुआ कि नहीं ?
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कभी-कभी क्या किया जाये , जरा समझ नहीं आता ,
ऐसे पल में दिल का दिमाग़ मुक़ाबिल * हुआ कि नहीं ?
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हवा के रूख को पहचानना बेहद ज़रूरी है ,
ख़िलाफ़ हवा के जो निकल पड़े , ज़ाहिल हुआ कि नहीं ?
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राहे-मंज़िल में गिरना-उठना तो लगा रहेगा ,
ख़तरा जो न उठाया यहाँ , ख़ुद हाइल * हुआ कि नहीं ?
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बिछुड़ के ख़ुद से बहुत चला था ये “कृष्णा” यहाँ पर ,
कोई तो बता दे अब भी वो क़ाबिल हुआ कि नहीं ?
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*ग़ाफ़िल = लापरवाह
*मुक़ाबिल = प्रतिद्वंद्वी
*हाइल = बाधा
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— °•K.S. PATEL•°
( 29 / 11/ 2018 )

         

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