ग़म से भी पटरी बिठानी चाहिए

++ग़ज़ल++(2122 2122 212 )
ग़म से भी पटरी बिठानी चाहिए
शादमाँ गर ज़िंदगानी चाहिए
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दोस्ती कर ले क़ज़ा से तू मगर
आँख का मरना न पानी चाहिए
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पिस रही है गर ग़रीबी में अवाम
मीर को कुछ शर्म आनी चाहिए
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नाम करना है अगर दुनिया में तो
कमतरी की सोच जानी चाहिए
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गर नदी को रहना है बनकर नदी
तो किनारों पर भी पानी चाहिए
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आरज़ू अम्न-ओ-सुकूँ की है अगर
पौध भी वैसी लगानी चाहिए
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सरहदों पर फौजियों के साथ साथ
हर जवाँ की पासबानी चाहिए
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उम्र का अब आ गया ऐसा मुकाम
ज़ीस्त को संगत रूहानी चाहिए
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बोलबाला हो सदा सच का ‘तुरंत ‘
झूठ की नज़रें झुकानी चाहिए
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत ‘ बीकानेरी
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30 /03 /2018
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