ज़िंदगी पे यकीन

झूटे फ़रेबी लोग सियासी यक़ीन क्या
करता है तू भी बात पे इनकी यक़ीन क्या

कब मौत आके अपनी ले आग़ोश में हमें
पल-भर की ज़िंदगानी है साथी यक़ीन क्या

ख़लक़त ना एतबार करे जिसकी बात पर
हर एक बात उसकी है झूटी यक़ीन क्या

ख़ाकी बदन पे नाज़ *का मतलब है कजरवी
मिट्टी से जा मिलेगी ये मिट्टी यक़ीन क्या

सुसराल वाले कार जो मांगें तो कार दूं
लेकिन रहेगी ख़ुश मेरी बेटी यक़ीन क्या

माना कि एतिकाफ़ है तुझको अज़ीज़-तर
लेकिन हलाल हो तेरी रोटी यक़ीन क्या

जो थे ज़माना साज़ यहां वो भी मर गए
फिर ज़िंदगी पे साद को अपनी यक़ीन क्या

अरशद साद रुदौलवी

         

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