कुछ गाने सच में कमाल कर जाते हैं।

शुक्रवार की शाम जब ऑफिस खत्म होता है तो बचपन के स्कूल की छुट्टी याद आ जाती है। बस जल्दी घर भाग जाएँ।
पर दिल्ली की ट्रैफिक भी कहाँ मानती है। आई टी ओ से लेकर काश्मीरी गेट तक ट्रैफिक गजगामिनी की तरह ठहर-ठहर के चल रही थी। मैं श्रीमतीजी के साथ कार में बैठा शाम के 7 बजे ट्रैफिक में फँसा नेवले के मुँह में साँप की तरह,न उगला जाए न निगला। एक अच्छी बात हुई कि कार मैं ड्राइव कर रहा था,सो एफ एम के चैनल्स भी बदलने का काम भी श्रीमती जी ने मुझे ही थमा दिया था।
अचानक रेड एफ एम पर अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू की मधुर आवाज में हम आपके दिल में रहते हैं का कर्णप्रिय ट्रैक “ज़रा आँखों में काजल लगा लो सनम,सुर्ख चेहरे पे जुल्फें गिरा लो सनम,तेरे गालों पे जो काल तिल है,वही मेरा दिल है,वही में दिल है” चल पड़ा।
फिर अचानक,यक-ब-यक मुझे कौंधा कि आज जो मेरी श्रीमती जी है वो कई वर्षों तक मेरी महबूबा भी रह चुकी है और फिर तो सारे पुराने अरमान एक-एक करके मचलने लगे।
हालाँकि मेरी श्रीमत जी ने मैक के भरपूर काजल और लिपस्टिक का प्रयोग कर रखा था और लावण्य की पराकाष्ठा पे थीं, फिर भी दिल किया थोड़ा और श्रृंगार कर लेती तो “बिहारी भाषा में गरदा मच जाता”।
अभी तक जो ट्रैफिक बोर कर रही थी ,इस गाने की वजह से समंदर के किनारे लॉन्ग ड्राइव सी प्रतीत होने लगी और लगा बस ट्रैफिक यूँ ही धीरे-धीरे खिसकता रहे और मैं इस गाने की अंतरात्मा में खोके अपनी महबूबा की याद में खोया ही रहूँ।

कुछ गाने सच में कमाल कर जाते हैं।

         

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