गूंगी की चीखें

एक सच्ची लघुकथा

गूंगी की चीखें
_________
घर के कामो में इतना व्यस्त हो गयी थी ,
कि अपनो से मिलना मिलाना भी नहीं हो पा रहा था।
मन एक जगह रहते रहते बिल्कुल ऊब चुका था।
सो अपनी ननद से मिलने उसके घर जा पहूंची।
मुझे देख ननद काफी खुश हुई ,पर साथ में
सिकवा शिकायत भी की हम एक ही शहर
में रह कर भी इतने दिन बाद मिलते है ,
हम तो छोटे बच्चे की वजह से आपसे मिलने
नहीं आ पाते लेकिन भाभी आप तो आ सकती है
,उसका कहना सही था इसलिए मैं चुप रह गई ।
उसकी नन्ही प्यारी सी बेटी जब अपनी
तोतली बोली मे मामी बोली तो मेरी
ख़ुशी का ठीकाना न रहा।उससे बाते करते
कब रात हो गयी पता ही नहीं चला।करीब ११ बजे
हम सभी सो गये। बीच रात में मेरी अचानक
नींद खुल गई, किसी की जोड़ जोड़ से
चीखने की आवाजें आ रही थी,
जैसे कोई किसी का गला दबा रहा हो।
मैं अपनी ननद को उठाई बोली देखिये ना
कोई लड़की चीख रही है। ननद बोली
भाभी आप सो जाओ वो एक पागल लड़की है ।
ऐसे ही कभी कभी रात में चीखती रहती है।
ये बोल कर मेरी ननद सो गई पर मेरी नींद
अब कोसो दूर जा चुकी थी, रह रह कर उस
लड़की की चीख सुनाई दे रही थी। फिर घीरे घीरे
चीखें कम हो गई और मैं भी सो गई। सुबह जब
आंख खुली मेरी नज़र उसकी मकान की तरफ
थी जिससे उस लड़की की चीखें आ रही थी।
मैं बेड से उतर कर खिड़की के पास जा कर उस
मकान को देखे जा रही थी , दरअसल मैं उस
लड़की को देखना चाह रही थी। पर उस मकान
के सभी खिड़की बंद थे। तभी दरवाजे पर किसी
ने दस्तक दी, काम वाली बाई थी।वो मुझे देखते
ही बोलने लगी क्या देख रही हो भाभी, मैं बोली
सामने कोई पागल लड़की रहती हैं ना….
मेरा इतना कहते ही वो जोड़ जोड़ से हसने लगी।
मैं पूछी अरे हंस क्यों रही हो ,वो बोली भाभी
कोई पागल ना है । मैं बोली फिर रात में चीखता कौन है।
पहले तो वो सकपकाई बात को टालना चाही।
पर मेरे बार बार पुछने पर वो बोल पड़ी कहने
लगी भाभी किसी से बोलना मत , मैं उसे भरोसा
दिलाई कि मैं तुम्हारा नाम कभी नहीं लूंगी।
फिर जा कर वो बोली कहने लगी भाभी
ये मकान एक दरोगा का है उसे सात बेटी ही है बेटा
नहीं है। दो बेटी की शादी हो गई हैऔर पांच
अभी भी कुमारी है। एक गुंगी और अपाहिज है
कोई इसलिए शादी नहीं करता, दरोगा हरामी है
भाभी रोज शराब पी कर घर आता है और
अपनी ही बेटी के साथ मुंह काला करता है ।
अगर बीबी कुछ बोले तो उसे जानवर की तरह पीटता है भाभी।
जानते सब है भाभी पर बोलता कोई नहीं।
अपना पाप छुपाने के लिए दरोगा
सब से झूठ बोलता है भाभी की बेटी पागल है।
वो बहुत हरामी है भाभी। उसकी बातों को सुन
कर तो मैं जैसे पत्थर हो गई, कोई बाप
कैसे ऐसा कर सकता है। भाभी भाभी क्या हुआ काम
वाली ने मुझे झकझोर दिया भाभी अब मुझे काम
कर लेने दो दुसरे घर भी जाना है भाभी ।
पर मैं अब भी जड़ बनी थी और उस मकान
के तरफ देखे जा रही थी। दिमाग मे बस एक
ही बात कौंध रही थी हम आज कैसे समाज में
जी रहें जहां एक मासूम की चीख पुकार भी
सुनने वाला कोई नहीं… क्या हम गूंगे बहरे अंधे है ?
सवाल कई थे पर जवाब अब भी शून्य।
© अंशु कुमारी

         

Share: