दोहरा व्यक्तित्व

कल एक पार्टी में अचानक मेरी मुलाकात मिसेज खन्ना से हुई । आकर्षक और प्रभावशाली व्यक्तित्व की स्वामिनी ,अपने चेहरे पर शिष्ट सी मुस्कान ओढ़े पार्टी में लोगों के बीच आकर्षण का मुद्दा बनी हुई काफी खुश नजर आ रही थी । अपने पति को बिजनेस में मदद करती हुई यकीनन वो एक सफल महिला थी ।
मै भी दूर से देखने पर उनसेबहुत प्रभावित हो रही थी ।अचानक एक मोबाईल कॉल आ जाने के कारण भीड़ से छिटक कर किसी से बात करने के लिए वो मेरे नजदीक आ कर खड़ी हो गयी ,उनकी बातें सुनकर मुझे समझ आ गया था कि वो अपनी बेटी से बात कर रही है और बेटी शायद कुछ परेशान थी ।
मिसेस खन्ना का बात करने का तरीका काफी रूखा था । वो उसकी बातों पर गौर ना करते हुए उसे बुरी तरह से डाँट रही थी कि उसने फोन क्यों किया । उनकी बातों से स्पष्ट था कि ऐसे समय में खुद को परेशान किया जाना उन्हें नागवार गुजर रहा था जबकि वह अपनी अहमियत पार्टी में जताने में व्यस्त थी ।मै उनके खुशनुमा व्यवहार में अचानक आये इस परिवर्तन को देख कर दंग रह गयी । उस आकर्षक व्यक्तित्व के पीछे मुझे वो ओरत नजर आयी जो सबको खुश करने की कोशिश में लगी थी सिवाय उनके जो उसके जीवन में सबसे ज्यादा अहमियत रखते है !उनके बच्चे ,उनका परिवार !
मुझे इस घटना ने ये सोचने पर मजबूर किया कि हम अकसर अपनी भौतिक इच्छाओं,आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने की दौड़ में इस हद तक डूब जाते है कि अपने प्रियजनों के साथ सम्बन्धों को घनिष्ट बनाने की और तवज्जो ही नही देते ।
जबकि देखा जाये तो वही तो हमारी सबसे कीमती पूँजी है!

“वन्दना”

         

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