परा शक्तियाँ

करीब एक साल पहले पड़ोस के शर्मा जी का बेटा समीर ,जो करीब 40 साल का था साइलेंट हार्ट अटैक से गुजर गया । रीतिरिवाज के अनुसार तीसरे दिन उनके एकलौते पुत्र को अस्थि विसर्जित करने हरिद्वार जाना था ।
हमारे यहाँ प्रायः सभी वर्णो में रिवाज है कि मृत व्यक्ति के छोटे भाई ,भतीजे या पुत्र की वधु ही उसके सारे कार्यो में सहयोग कर सकती है।माता ,दादी,,बुआ,बहन,बेटी ,भाभी ( मृतक से बड़ी ,घर की महिला सदस्य जो भी होती हैं )ये सब मृतक व्यक्ति से सम्बंधित किसी भी कार्य मे हाथ नही लगाती है।
अस्थि विसर्जन के लिए मन्दिर में दर्शन करके रवाना होना अनिवार्य होता है तो रिवाज के मुताबिक समीर के भतीजे की बहू ,पड़ोस की अन्य महिलाओं के साथ समीर के बेटे व अन्य रिश्तेदारों को विदा करके पानी का कलश ले कर घर लौट आयी ओर घर के दरवाजे तक पहुँचते -पहुँचते
अचानक बेहोश हो गयी ।
सबने सोचा शायद गमगीन माहौल और थकान के कारण ऐसा हुआ है । डॉक्टर को बुलाया गया , उन्होंने कुछ दवाएं दी और इंजेक्शन लगा दिया और आराम करने की सलाह दी ।
चूँकि घर का माहौल बहुत गमगीन था । तो पड़ोसी होने के नाते मैं वही उनके भतीजे की बहू को संभालने के लिए रुक गयी ।

मैं आराम से उसके पास बैठी थी कि अचानक उसने अपनी आँखें खोली ,,मैंने देखा उसकी आँखो में सुर्ख लाल डोरे तैर रहे थे और चेहरे पर एक भयानक सी हँसी …”नही छोड़ूँगा इसे…साथ ले कर जाऊँगा …मैं नही छोड़ने वाला इसे ..और वो बैड पर लेटी हुई अचानक से अपना सिर दीवार पर बुरी तरह से मारने लगी । मैं घबरा गई और फुर्ती से उसको पकड़ कर उसे चोटिल होने से बचाने की कोशिश करने लगी ।
तब तक कोलाहल सुनकर सब लोग अंदर आ गए । बहुत देर तक ये सब चलता रहा ,उसका जोर बढ़ता जा रहा था और मुझे ये लग रहा था कि जैसे ही मैंने उसे छोड़ा वो मेरा गला दबा देगी । मेरे साथ उनके घर के तीन सदस्यों ने ओर पकड़ा उसे क़ाबू में रखने के लिए फिर डॉक्टर को बुलाया गया और साथ ही पड़ोस के बालाजी के मंदिर से जल और भभूति मंगा कर उस पर छिड़की गयी ।
डॉ. साहब ने नींद का इंजेक्शन भी दिया । और करीब 2 घण्टे बाद जाकर उसे नींद आयी और मौहोल शान्त हुआ ।

उसके बाद भी 12 दिन तक वो यूँ ही आराम से बैठी बैठी ही इतनी आक्रामक हो जाती कि पाँच-पाँच युवा पुरुष सदस्यों के वश में भी नही आती और अपने को चोट पहुँचाने का प्रयास करने लगती और कुछ ही पल में ऐसा व्यवहार करती मानों कुछ पता ही न हो कि क्या हुआ “अरे आप सबने मुझे पकड़ा क्यों है ,,, छोड़ो मुझे !! और घूँघट निकाल लेती ।
शर्मा जी ने उसे तीन डॉक्टरों और दो अच्छे साइक्लोजिस्ट को दिखाया । सभी डॉक्टर्स ने यही कहा ,”कोई बीमारी नही है इसे अटेंशन चाहिए और इसके दिमाग मे गुस्से की वजह से गर्मी भर गई । इसकी इन हरकतों को इग्नोर करो अपने आप नार्मल हो जाएगी ।

पर घर की महिलाओं को डॉ. की बात पर भरोसा नही हुआ । वो बहू को लेकर करीब चार बाबाओं (तांत्रिक ,पण्डित जी ,साधु महाराज ,,पितर जी ,जो मनुष्य के मुख से बोलते है )के पास ले कर गयी ।उन्होंने बताया कि ऊपरी हवा का प्रकोप है ।कोई मृतात्मा आपकी बहु को परेशान कर रही है। ताबीज बना कर बहू के गले मे पहना दिया और पवित्र जल और भभूति दे दी

खैर जो भी कारण रहा हो पर इस सारी भागदौड़ और डॉक्टर्स के इलाज से बहू ठीक हो गयी ।
पर दीवाली ओर उसके बाद होली पर बहू फिर से करीब घण्टे भर के लिए वैसी ही हरकतें करने लगी और जब उसकी सास ने बाबाजी के दिये जल और भभूति को उसे पिलाया तो वो ठीक हो गई ।

ये सारी घटनाएं सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वाकई मृतात्मायें किसी जीवित इन्सान को अपना शिकार बनाती है या ये सब महज मानव मस्तिष्क के विकार होते है !!

जानकारी के लिए ये भी बताना चाहूंगी कि इस बहू को अपने घर मे कोई तकलीफ नही है। इसकी सास इसे बेटी से भी ज्यादा प्यार और मान देती है। पति भी बहुत प्यार करता है ।दो बच्चे है इसके ओर बहुत ही खुशहाल जीवन जी रही है ।
पर अचानक से ये परिवर्तन आना बहुत आश्चर्यजनक है ।

©★वन्दना★

         

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