बहू और बेटी

अरे भाभी !! तुमने अचानक रोहित की शादी कैसे तय कर दी ?
करुणा ,, क्या बताऊं तुम्हें …..तुम्हें तो पता ही है यह मुई स्लिप डिस्क वाली प्रॉब्लम…. यह मुझे जीने ही नहीं देती है ,
अब तो डॉक्टर ने साफ मना कर दिया है कि कोई काम नहीं करना है…. सिर्फ बैड रेस्ट करो बस…. इसीलिए सोचा कि बहू ले आऊँ घर में …..तो आराम से बैड रेस्ट हो जाएगा ।
ये अच्छा किया आपने …मैं मुस्कुराते हुए बोली ।
पर आप तो पहले सुमि की शादी करने वाली थी ना ?
अरे , देखने तो उसके लिए लड़का ही गये थे , लड़का भी अच्छा था , घर बार भी अच्छा था ,,सब कुछ जँच गया था ।
पर जब हम उनके घर गए तो देखा कि लड़के की माँ अपने पैरों में कमजोरी के कारण चल ही नही सकती … उनकी जिंदगी तो अब व्हीलचेयर पर ही कटेगी ….अब तू ही बता ,खेलने खाने की उम्र में अपनी नाजों से पली सुमि को उससे कैसे बांध देती !
हम उसे वहां कैसे दे सकते थे !!
जिंदगी भर सास और घर में ही बंध कर रह जाती मेरी फूल सी बच्ची ।
लड़के तो और मिल जाएंगे …आखिर अपनी सुमि में कमी ही क्या है !
अच्छा चलो बाद में बात करती हूँ अभी बहुत काम पड़ा है…. कहते हुए भाभी ने फोन रख दिया ।
ओके भाभी ….बाय…. मैं फ़ोन रखते हुए भाभी की दोगली मानसिकता पर हैरान थी ।
उनकी होने वाली बहू भी तो आखिर किसी की नाजो से पली , फूल सी बच्ची है !

© ★वंदना धाभाई★

         

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