मेरी कलकत्ता यात्रा

हर तरफ विशाल अटटीकाएँ जो आकाश को झूमती हुई मालूम होती थी । पग-पग पर बड़े-बड़े मॉल व मनोरंजन स्थलों की भरमार । हर ओर बेहतरीन सड़के,जिनको बनाने में सरकार को तो व्यय करना ही पड़ा होगा, मगर उसकी सफाई की जिम्मेदारी को वहां के लोगों ने ही निभाया होगा ।

साफ-सुथरी सड़कें सांप की तरह टेढ़े-मेढ़े भागी जा रही थी और उन्हीं के साथ कुछ अन्य सवारी पर और कुछ पैदल मुसाफिर भी द्रुतगति से चले जा रहे थे ।

धरती पर गाड़ियों के अंदर हम सभी साथियों का गायन हो रहा था और बाहर खुले आसमान में पीछे छूटती वस्तुएं ऐसा आभास दिला रही थीं, जैसे वो हमारे गायन के लय पर थिरक रही हों ,या हमारा पीछा कर रही हों।
सुंदर जलवायु, मनहर वातावरण, साफ सड़कें ———सबकुछ मनोरम प्रतीत हो रहा था । यहां कई दर्शनीय स्थल भी थे । हम लोगों का वाहन जब *हावड़ा ब्रिज* पर से गुजरा तो उस वक्त ऐसा लगा जैसे हम नदी के ऊपर ही उड़ रहे हों। इसी क्रम में एक मार्ग ऐसा भी आया जो सर्पिलाकार तो था ही, साथ ही इन मार्गों के चारों ओर ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी थे। मानो सड़कें पहाड़ों की गोद में हो । बीच-बीच में नदियां भी थीं। यह रास्ता *जलेबी* की भांति ही गोलाकार था; जहां से गुजरते वक्त सर में चक्कर भी आ गए थे।इस स्थान के बारे में मालूम करने पर पता चला कि इसे *कोडरमा-घाटी* कहा जाता है । ये जानकर और भी खुशी हो रही थी की फिल्मों में डाकुओं के लिए इसी दृश्य को फिल्माया जाता है ।इतना ही नहीं *हावड़ा-ब्रिज* के नीचे फिल्मों की शूटिंग भी होती है।

हमें इस मार्ग से गुजरते हुए ऐसे-ऐसे सुंदर स्थान मिले कि वहाँ थोड़ी देर और ठहरने की इच्छा होती थी ।पहाड़ो व जंगलो की ऐसी मनोरम जोड़ी देख कर मन प्रफ्फुलित हुआ जा रहा था। पथरीली जमीन,कल-कल करती नदियाँ, चहकती चिड़ियों का आनंददायी शोर।सब कुछ मनोरम था ।

पारम्परिक परिधानों में वहाँ के निवासी राहों पे खड़े होकर जब हमलोगों की ओर देखते तो ऐसा प्रतीत होता था कि—-वो अपने नगर में हमारा स्वागत कर रहें हों ।

इस प्रकार मार्ग-दर्शन व नगर दर्शन का आनंद उठाते हुए हमलोग वहाँ के *टाउन-हॉल* में पहुँचे—–जहाँ मोदी केयर की ओर से भव्य आयोजन किया गया था ।वहाँ पहुंच कर हमारा रोमांच व आनंद दोनों ही दुगुना हो गया जब मंच पर लोकगीत गायिका *शारदा सिन्हा* जी का आगमन हुआ। उस वक़्त ऐसा लग रहा था कि हम संगीत की दुनियां में ही आ गए हों ।एक और गायिका आयीं जिनका नाम मुझे स्मरण नहीं है,,,उन्होंने भी अपनी मधुर तान से सभी को मोहित कर लिया । गीत-संगीत के बाद कुछ मंझे हुए कलाकारों के द्वारा *जय हो* गीत पर बड़ा ही रोमांचकारी नृत्य प्रस्तुत किया गया। कई बार तो मेरी चीखें भी निकल आयीं।
उसके बाद कार्यक्रम की समाप्ति होने पर सभी अपने- अपने वाहन पर सवार हो गए।इस प्रकार से यह यात्रा हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा थी ।इसकी याद भुलाने से भी नहीं भूलने की है ।इस यात्रा ने मेरे मन मस्तिष्क पर जादू-सा कर दिया है ।ये वो यात्रा थी ,जिसकी यादें अभी भी ताज़ा ही है।इसकी स्मृति मेरे मानस-पटल पर इस कदर से अंकित हो गयी है कि आज भी जब कभी सोचती हूँ तो लगता है ,कल ही यात्रा की हो और जिसके बारे में लिखते हुए कलम भी नहीं थकता है।

*स्वराक्षी स्वरा*

         

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