—-वो शराबी—

—-वो शराबी—
गाड़ी में तीन सीट वाली जगह पर चारों लड़कियाँ बैठ गई थीं। मैं ड्राईवर के साथ वाली सीट पर आगे बैठ गया था। विवाह समारोह से लौटते वक्त रात के ग्यारह बज चुके थे। हर तरफ अँधकार का साम्राज्य। ड्राईवर रास्ता भटक गया और एक अंजान वीरान सड़क का रास्ता….। थोड़ी ही देर में ड्राईवर सहित सबकी समझ में आ गया कि रास्ता अनजाना है। किन्तु अब रास्ता पूछे भी तो किससे? आगे बढ़ते जाने के सिवाय कोई चारा नहीं था।गाड़ी रोककर खड़ा होना ऐसे नितांत जंगल में ख़तरों को दावत देने जैसा था। सड़क के साथ वाले खेत से एक व्यक्ति जो वेशभूषा से किसान लग रहा था,आता दिखाई दिया।
सभी के कहने पर गाड़ी रोक पूछा- “भैया! ये कौन सी जगह है?”
बदले में उसने भी सवाल किया -“आप लोगों को कहां जाना है?”
“सोनीपत।” लगभग सभी एक साथ बोले।
“ये तो तुम बहुत ही गलत रास्ते पर आ गये हो, आगे रास्ता बहुत ही ख़तरनाक है” गाड़ी के अंदर की तरफ झांकते हुए बोला- ” लड़कियां भी साथ हैं।” कह कर उस भले आदमी के चेहरे पर कुछ चिंता झलक आई। किसान से रास्ता पूछ व समझ कर ड्राईवर ने गाड़ी का रुख़ मोड़ दिया। वह अंदर ही अंदर बहुत डरा हुआ ,घबराया हुआ था। लड़कियों सहित सभी को वक्त पर व सुरक्षित पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी थी।
घबराहट में उसने गाड़ी की रफ्तार बहुत तेज कर दी।पहले से ही डरे-सहमे बच्चे रफ्तार कम करने के लिये चिल्लाने लगे तो ड्राईवर ने रफ्तार कुछ कम की।रात बहुत हो चुकी थी।गाड़ी सही गंतव्य पथ पर बढ़ रही थी। पीछे बैठी नेहा दी बोली ” मुझे तो डर लग रहा है।” ” तू ड़र मत कोई भी मुसीबत पहले मेरे पास ही आएगी मैं हूं न इधर विंड़ो के साथ।”दी की फ्रैंड विप्रा बोली। अपना डर कम करने के लिए सभी मस्ती करने लगे- “हँसते हँसते कट जाएँ रस्ते, जिंदगी यूं ही.. जिंदगी एक सफ़र है सुहाना यहां कल क्या हो….. मन्नु भाई मोटर चली पम्म पम्म पम्म….आधी रात के बाद गलियों में जब अँधेरा होता है एक आवाज आती है…चोर-चोर… चोर-चोर….कभी
अलविदा न कहना कभी अलविदा न कहना”…..मोड़ पर जैसे ही गाड़ी मोड़ी…भड़ाक्…….एक जबर्दस्त धमाके की आवाज के साथ ही सबकी चीख़ एक साथ निकली और फिर निस्तब्धता छा गई।आने जाने वाले वाहन दूर से देख कर आगे खिसक जाते।मुझे सुध सी आई गाड़ी में कुछ सरसराहट सी महसूस हुई फिर कांपती थरथराई सी नेहा दी की मद्धिम सी आवाज ” भाई!भाई! तू ठीक तो है न?” “हां बहन मैं ठीक हूं और तू…?” मैंने कँधे के दर्द को सहन करते हुए बोला। अपने साथियों को देखा जो कुछ होश में आने लगे थे सिमरन पूरी तरह टूटे काँच की किरचियों में नहाई थी और पूजाओफ्फ..मुंह से खून बह रहा था जबड़ा हाथ में आ गया और वह हाथ मुंह पर सटाये जबड़े को जबरन चिपकाये थी। विप्रा को हमने बाहर निकालने के लिये बहुत प्रयत्न किया पर वो हिल भी नहीं रही थी। टूटी विंड़ो मे फँस गई थी। कनपटी से बेतहाशा खून बह रहा था। मेरी रूलाई फूट पड़ने को थी पर रोने का वक्त कहां था। इन सबसे छोटा होते हुए भी बडे का फ़र्ज निभाना था।
एक आदमी ज्यों ही हमारे पास आकर खड़ा हुआ बदबूदार भभका मेरे नथुनों में
भर गया व मन शंका से। आस पास खेतों में काम कर रहे किसान जो दिन में अत्यधिक गर्मी के कारण रात को ही धान के खेतों में ट्यूबैल चला कर पानी दे रहे थे, आ गए। सब दूर खड़े थे। एक युवक हमारी तरफ आया तो मैंने भर्राई हुई आवाज मेंही मदद के लिए रिक्वैस्ट की।ग्रामीण आने-जाने वाले वाहनों को रोकने की कोशिश में लगे थे। बड़ी मशक्कत के बाद विंड़ो तोड़ कर विप्रा को निकाला।कनपटी से बहता लहु रुक नहीं रहा था वहअब भी बेहोश थी सिर के दाहिने हिस्से मेंबहुत चोटें आई थीं। उसका व पूजा का तुरंत हॉस्पिटल पहुंचाना बहुत ही जरूरी था। कोई वाहन घायलों को ले जाने को तैयार नहीं था। एक गाड़ी आकर रूकीतो लोगों ने उनसे मदद के लिये कहा पर इंकार कर आगे बढ़ने लगे- “या तै इन घायलां ने अस्पताल पुंच्या दो न तै खैर नहीं सै थारी।हाथ में लाठी दीखै सै न।” वो शराबी गरज कर बोला और हाथ में लाठी लिये सड़क के बीच में खड़ा हो गया।
मजबूरन उन्हें ले जाना पड़ा उनके साथ सिमरन को बिठा दिया। ड्राईवर न जाने कहां गायब हो गया। भीड़ में से एक बोला ” तू भी उनके साथगाड़ी में बैठ जा” मैंनेकहा-” मैं अपनी बहन को छोड़ कर नहीं जाता। “ये हमारी भी बहन जैसी है ,हम पहुंचा देंगे।” वे बोले। “नहीं ये सिर्फ मेरी बहन है।” नेहा दी अभी तक डरी सहमी कांप रहीथी हम दोनों बहन भाई लिपट कर रो पड़े।कुछ संभले तो घर फोन कर डैड़ी को सब बताया व विप्रा के घर फोन कर उसके मम्मी पापा को सिविल हॉस्पिटल पहुंचने को बोला। उस शराबी ने लाठी के बल पर एक और गाड़ी रुकवाईऔर हम बहन भाई को संकेत कर बैठने को कहा गाड़ी में महिला व बच्ची को देख हमने बैठना उचित समझा।सब सिविल हॉस्पिटल पहुंच चुके थे। पूजा के पापा वहीं पर डैंटिस्ट थे तो उसका इलाजशुरू हो चुका था, विप्रा को फस्ट ऐड़ देकर दिल्ली जयपुर गोल्ड़न अस्पताल के लिये रैफ़र कर दिया गया।वह दो-तीन महीनों में ठीक होकर घर आगई। आज सब अपनी अपनी जिंदगी में खुश हैं मगर वो शराबी जो उस काली रात में, हमारी जिंदगी में संकट-मोचक बन कर आया था…कभी नहीं भूल पाता।
—राजश्री—

         

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