कह मुकरियां

उस से जो मै मिल ना पाऊँ
सच कितना ही मैं घबराऊँ
मिले चैन, देखु जब तेरा लुक
का सखी साजन,ना सखी फेसबुक।।

जब से वो जीवन मे आया
कितना सुकून मैंने पाया
कर ना पाउँ खाना भी कुक
का सखी साजन,ना सखी फेसबुक।।

वो ही मेरे जीवन का सार
वो ही बना है अब आधार
रास ना आये अब कोई एप्प
का सखी साजन,ना सखी व्हाट्सएप।।

आया जब जीवन मे प्यार
रास ना आये कोई यार
भूल गयी अब चकला बेलन
का सखी साजन,ना सखी लेखन।।

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✍संध्या चतुर्वेदी
मथुरा उप

         

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