बहू कामना – कुंडलियाँ

सास बहु बैठे कहते , कितनी प्यारी बात ।
मुख फुलाये पग सिमटे , किसके चिकने पात ।।

किसके चिकने पात ,जने नहीं पूत कपूत ।
नंदी बैल रहा कभी ,था वही मेरा सपूत ।

बना गई वह दास ,छुटे मंतर यही आस।
बहु सोच रही ख़ास ,परलोक सिधारे सास ।।
नवीन कुमार तिवारी ,,

         

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