ख़याली पकौड़े

शब भर रहा परेशाँ
क्या वो मुझे छोड़ देगी ?
कहीं वो नाराज़ तो नहीं ?
नहीं नहीं मैं उसे मना लूँगा
हुई सहर तो याद आया कौन वो ?
वो तो कोई है ही नहीं
(हैं तो सिर्फ ख़याली पकौड़े)
हाँ नई तो

         

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